Anal Fissure

गुदा या गुदा नलिका में किसी प्रकार की दरार व कट जाने को भगन्दर कहा जाता हैं. यह रोग कब्ज के कारण से अधितर होता है, जब रोगी मलत्याग करने बैठता है और कांखता है या जोर लगाकर मलत्याग करता है तो उसके मलद्वार की मांस की पेशी या उसके चारों ओर की श्लैष्मिक झिल्ली फट जाती है। इस रोग के कारण से मलत्याग करते समय या मलत्याग करने के बाद जलन महसूस होती है, मलत्याग करते समय खून की लकीर सी पड़ी दिखाई पड़ती है। इस प्रकार से गुदा फटने के समय में रोगी को बहुत अधिक परेशानी होती है, यहा तक की रोगी कभी-कभी बेहोश भी हो जाता है। रोगी की यह अवस्था तीन-चार घंटे तक चलती रहती है।

फिशर या भगन्दर के लक्षण

मलत्याग के दौरान दर्द होना जलन होना
मलत्याग में गहरा लाल रंग दिखना
त्वचा में गाँठ बनना
गुदा के आस पास खुजली होना

फिशर या भगन्दर के कारण

फिशर का मुख्य कारण हैं मल का सख्त होना
ये रोग उम्र के साथ भी हो सकता हैं
लगातार दस्त होना
पेट साफ ना रहना
अधिक मसालेदार खाने का सेवन
कब्ज होना
गर्भवस्ता व प्रसव के दौरान आदि फिशर के कुछ मुख्य कारण हैं

फिशर के लिए कुछ होम्योपैथिक दवाएं
आधे गिलास पानी में : Collinsonia Q की ५ बुँदे, Aesculus Hippocastinum की ५-६ बुँदे, Hamamelis Virginica q की ५-६ बुँदे, Ratanhia q की ५-६ बुँदे मिला कर लें.
इन दवाओं के सेवन से आपको फिशर में आराम मिलेगा।

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