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Tonsils Homeopathic Treatment in Hindi : Tonsils Homeopathic Treatment in Hindi described here. Name of homeopathic medicine for tonsillitis in Hindi.

Tonsils Homeopathic Treatment in Hindi language

टॉन्सिल का होम्योपैथिक उपचार हिंदी में – जानें टोन्सिल का होम्योपैथिक द्वारा उपचार कैसे करें।

टॉन्सिल

टोन्सिल हमारे शरीर में पहले से ही मौजूद होता है, यह लसीका प्रणाली का हिस्सा होते हैं, यह हमारे जीभ के पीछे की भाग से सटा हुआ होता है | यह हमारे गले में जहा पर नाक का छिद्र तथा मुख का छिद्र मिलता है, ठीक वही पर जीभ के पिछले भाग से जुडा हुआ स्थित पाया जाता है | टॉन्सिल में होने वाले इन्फेक्शन को टॉन्सिलाइटिस कहते हैं।
देखा गया है की टॉन्सिल से सामान्य तौर पर कोई परेशानी नहीं होती लेकिन अगर किसी कारण वास इसमें संक्रमण हो जाये या इसमें सुजन आ जाये तो इससे काफी दर्द होता है | दर्द के कारण कभी कभी खाना खाने में एवं मुह को खुलने में पानी पिने में या कोई चीज़ निगलने में काफी तकलीफ होने लगाती हैं. टॉन्सिल के लिए चिकित्सक गर्म पानी का सेवन व गुनगुने पानी से गरारा करने का परामर्श देते हैं.

टॉन्सिल के बढ़ने और फूलने का विशेष कारण शरीर में विषैले पदार्थों का बहुत अधिक मात्रा में एकत्रित होना होता है कई बार लोग इस रोग में ऑपरेशन करने की सलाह देते हैं। कब्ज को दूर करना और शरीर को विकार रहित करना और निर्मल बनाना ही इस रोग का मुख्य उपचार है.  जब शरीर में दूषित द्रव्य मिलते हैं तो वह टॉन्सिल की वृधि से गले में  फोड़ा फुंसी आदि भिन्न-भिन्न रूपों को धारण करके प्राकृतिक तौर पर बाहर निकलने की कोशिश करते है। जिससे तकलीफ होना स्वभाविक है।

टॉन्सिल बढ़ने के कुछ अन्य कारण भी होते हैं। जैसे समय-समय पर  ठंड लग जाना है, पानी  में भीगना, अधिक मेहनत करना ,बंद हवा में श्वास लेना , स्वर यंत्रों को अधिक से अधिक काम में लाना आदि इस रोग के कारण होते है. 

टॉन्सिल गले के मल को बाहर निकालने की ग्रंथि होती है वह शरीर के मैल निकालने का बहुमूल्य अंग होती है। टॉन्सिल को स्वस्थ रखने से शरीर को स्वस्थ रखने में सहायता मिलती है टॉन्सिल में जब संक्रमण पैदा होता है तब व्यक्ति टॉन्सिल रोग से ग्रस्त हो जाता है। बार-बार होने से गले में टॉन्सिल आकार में बड़े और कठोर हो जाते हैं। 

जानें ल्‍यूकोरिया का होम्योपैथिक द्वारा उपचार।

टॉन्सिल के अनेक लक्षण देखे गए है, जिनमे से कुछ सामान्य लक्षण निम्न हैं :-
गले में खरास, सूजन व दर्द महसूस होना |
कान के निचले भाग में भी दर्द महसूस होना |
दर्द के कारण बुखार महसूस होना।
शारीरिक व मानसिक कमजोरी महसूस होना।
गर्दन में अकड़न महसूस होना।
सांसों से बदबू आना
बोलने में कठनाई होना
खाने पीने की चीज़ो को निगलने में कठनाई होना
टॉन्सिल में लाली होना
कई बार देखा गया है की, टॉन्सिल होने के कारण कई बार बच्चे बोलने में भी असमर्थ होते है,
ये कुछ लक्षण है जो टॉन्सिल में देखे जाते हैं.

टॉन्सिल के कारण :-

टॉन्सिल के कई कारण होते हैं, जिनमे से कुछ कारण निम्न है:-
ठंड के मौसम में टॉन्सिल होना
किसी ठंडी चीज़ के सेवन से
किसी वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण से
ज्यादा मसालेदार या मिर्च वाला भोजन के सेवन से
सर्दी जुकाम भी टॉन्सिल का कारण मन गया है
प्रदूषण, धूल व मिट्टी के कारण
पेट खराब होने के कारण
टॉन्सिल किसी भी उम्र में हो सकते हैं परन्तु छोटे बच्चों में ये समस्या आम तौर पर देखि गयी है, चलिए जानते है टॉन्सिल के लिए कुछ होम्योपैथिक उपचार।

टोन्सिल का होम्योपैथिक उपचार :

जानते है टॉन्सिल के लिए होम्योपैथिक दवाये :-
Belladonna 30, की २ बुँदे दिन में 3 बार ( २ बुँदे सवेरे , २ बुँदे दिन में, २ बुँदे शाम को).
Bio-Combination- 10 की ४ टेबलेट, Tonsiotern की १ गोली सवेरे, १ गोली दिन में, १ गोली शाम को आधे कप पानी के साथ दिन में ३ बार लें
इन दवाओं के सेवन से आपको टॉन्सिल में राहत मिलेगी।